उत्तराखंड भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। मैदान से लेकर पहाड़ तक तपिश के कारण जनजीवन प्रभावित है। मैदानी क्षेत्रों में पारे ने सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। लू के थपेड़ों से आमजन बेहाल हैं। लगातार 10 दिनों से मैदानी क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया जा रहा है, जो कि सामान्य से छह से नौ डिग्री सेल्सियस अधिक है। वहीं, रात के समय भी उमसभरी गर्मी बेहाल कर रही है। हरिद्वार में तापमान सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। जबकि, दून में भी 122 वर्षों में यह जून सबसे ज्यादा गर्म है। प्रदेश में भीषण गर्मी से राहत मिलने के बजाय पारा लगातार बढ़ता जा रहा है। सूरज के तेवर तल्ख हैं और आसमान से आग बरस रही है। देहरादून में सोमवार को अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे पहले केवल 1902 में ही जून में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार गया था।
वहीं, हरिद्वार में अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किए जाने का दावा किया जा रहा है, जो कि आल टाइम रिकार्ड है। फिलहाल मैदानी क्षेत्रों में गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं। हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। सोमवार को कुमाऊं के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बौछारें पड़ीं। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार, आज उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में ऊंचाई वाले स्थानों पर हल्की वर्षा हो सकती है। आसपास के निचले इलाकों में गर्जन के साथ झोंकेदार हवाएं और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका है। मैदानी क्षेत्रों में लू चलने को लेकर चेतावनी जारी की गई है।
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