9 साल का जादूगर साहिल उस समय अचानक से फेमस हो गया था, जब उसकी तारीफ खुद आनंद महिंद्रा ने की. रिपोर्ट- कैलाश सुयाल.
रामनगर (नैनीताल): उत्तराखंड के रामनगर की पहचान यूं तो विश्वभर में कॉर्बेट नगरी के रूप में होती है, लेकिन पिछले कुछ वक्त से यहां के एक नन्हे जादूगर ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है. सभी जानना चाहते हैं कि कौन है वो हुनरमंद बच्चा जो रामनगर में रहता है. आइए आपको उस बच्चे से रूबरू करवाते हैं. उम्र 9 साल, नाम साहिल और पहचान नन्हा जादूगर. नैनीताल जिले के रामनगर में रहने वाला ये 9 साल का जादूगर साहिल छोटी उम्र में बड़ा फनकार बनकर सामने आया है. लेकिन देशभर में नाम के बाद भी साहिल अपने पिता के साथ संघर्ष भरी जिंदगी जी रहा है. हालांकि, उसके सपने बहुत बड़े हैं.
विराट कोहली जैसा क्रिकेटर बनने का सपना: साहिल जादू की दुनिया में पहचान बनाने के साथ ही विराट कोहली की तरह क्रिकेटर बनकर भारतीय टीम के लिए खेलना और देश का नाम रोशन करना चाहता है. रामनगर रेलवे स्टेशन के पास एक छोटे से किराए के जर्जर मकान में रहने वाले नौ वर्षीय साहिल की कहानी संघर्ष, प्रतिभा और उम्मीदों से भरी हुई है. छोटी उम्र में ही अपने पिता को जादू के करतब दिखाते देखकर साहिल ने हाथ की कलाकारी सीखनी शुरू कर दी थी. देखते ही देखते उसने कई करतब सीख लिए और पिता के साथ अलग-अलग जगहों पर लोगों का मनोरंजन करने लगा.
वीडियो वायरल हुआ तो मदद के लिए बढ़ा हाथ: कभी रामनगर और नैनीताल की सड़कों पर अपने पिता के साथ जादू के करतब दिखाकर लोगों का मनोरंजन करने वाले साहिल का एक वीडियो इसी साल जून में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. उसकी प्रतिभा की देशभर में चर्चा होने लगी. दरअसल, सड़क किनारे सिक्के और गेंद से जुड़े करतब दिखाते हुए इस बच्चे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. रामनगर और नैनीताल आने वाले पर्यटकों द्वारा बनाए गए वीडियो ने देश का ध्यान खींचा तो उसकी प्रतिभा की चर्चा दूर-दूर तक होने लगी थी.
आनंद महिंद्रा भी साहिल की मदद के लिए आगे आए थे: यहां तक कि उस वीडियो ने महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा का ध्यान भी खींचा. साहिल के हुनर से महिंद्रा इतने प्रभावित हुए कि उसकी पढ़ाई में मदद के लिए आगे आए.
पिता ने स्कूल में कराया एडमिशन: आनंद महिंद्रा द्वारा परिवार को दो लाख रुपये का चेक दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी. बताया जाता है कि आनंद महिंद्रा चाहते थे कि साहिल को बेहतर शिक्षा के लिए बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाया जाए. हालांकि, साहिल की कम उम्र को देखते हुए परिवार ने उसे अपने पास रखकर ही पढ़ाई कराने का फैसला किया. इसके बाद उसके पिता रुखसान अली ने रामनगर के एक निजी स्कूल में साहिल का दाखिला कराया, ताकि वह जादू की कला के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रख सके. फिलहाल साहिल सेकंड क्लास में पढ़ता है.
मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है साहिल का परिवार: साहिल के पिता रुखसान अली मूल रूप से राजस्थान जयपुर के रहने वाले हैं. वह अपने परिवार के साथ रामनगर में किराए के मकान में रहते हैं. परिवार में चार बच्चे हैं और साहिल तीसरे नंबर पर है. परिवार की आजीविका जादू के शो और करतबों से होने वाली कमाई पर निर्भर है.
साहिल मुंबई में भी दिखा चुका अपनी कला के करतब: पिता के मुताबिक साहिल ने महज तीन साल की उम्र से ही जादू के करतब दिखाने शुरू कर दिए थे. बचपन से पिता के साथ रहकर उसने इस कला को करीब से देखा और धीरे-धीरे कई करतब सीख लिए. अब नौ साल की उम्र में वह अपने पिता के साथ विभिन्न स्थानों पर जादू करता है. वह मुंबई और विशाखापट्टनम जैसे शहरों में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुका है. सुहानी शाह के कार्यक्रम में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुका है.

चुनौती से कम नहीं जिंदगी: जिस बच्चे की प्रतिभा ने देशभर में लोगों का ध्यान खींचा, उसकी जिंदगी की चुनौतियां अब भी कम नहीं हुई हैं. परिवार आज भी किराए के जर्जर मकान में रहकर गुजर-बसर कर रहा है. साहिल के पिता जहां परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए शो करते हैं, वहीं छोटा जादूगर साहिल भी अपने हुनर से लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने की कोशिश करता है.
मेरा नाम साहिल जादूगर है और मैं 9 साल का हूं. मैं जादू दिखाने मुंबई और विशाखापट्टनम भी गया था. मैंने सुहानी मैम को भी जादू दिखाया था. अभी नैनीताल, रामनगर और दूसरे क्षेत्रों में भी जादू दिखाता हूं. मैं विराट कोहली की तरह क्रिकेटर बनना चाहता हूं और देश का नाम रोशन करना चाहता हूं.
– साहिल, छोटा जादूगर –
वहीं साहिल के पिता रुखसान अली कहते हैं कि,
साहिल मुझे जादू दिखाते हुए देखकर ही बहुत कुछ सीख गया. ये भी कई तरह के करतब दिखा लेता है. साहिल का सपना जादूगर के साथ ही बड़ा होकर क्रिकेटर भी बनने का भी है. यह विराट कोहली की तरह क्रिकेट खेलकर देश का नाम रोशन करना चाहता है. शो दिखाकर घर चलाना पड़ता है, इसलिए जहां मौका मिलता है, वहां कार्यक्रम कर लेते हैं.
– रुखसान अली, साहिल के पिता –
उम्र हुनर की मोहताज नहीं होती और ये 9 साल के इस नन्हे जादूगर ने साबित कर दिखाया है. ये कहानी उन तमाम परिवारों और बच्चों के लिए उम्मीद की मिसाल है, जो मुश्किल हालात के बावजूद बड़े सपने देखने का हौसला रखते हैं. उम्मीद है कि साहिल के सपनों को मंजिल जरूर मिले.
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