उत्तराखंड विधानसभा की केदारनाथ सीट के उपचुनाव में मिली जीत ने भाजपा में नए उत्साह का संचार तो किया ही है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का राजनीतिक कद भी बढ़ाया है। प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी इस सीट के चुनाव अभियान की कमान मुख्यमंत्री स्वयं संभाले रहे।
भाजपा विधायक शैलारानी रावत के निधन के कारण खाली हुई थी केदारनाथ विस सीट
चंपावत माडल पर चलते हुए सरकार व भाजपा संगठन दोनों ने बेहतर समन्वय से चुनाव अभियान को आगे बढ़ाकर विपक्ष के हौसले को पस्त कर दिया। भाजपा विधायक शैलारानी रावत के निधन के कारण रिक्त हुई विधानसभा की केदारनाथ सीट को अपने पास बनाए रखने की भाजपा के सम्मुख चुनौती थी। इसे देखते हुए पार्टी उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित होने से काफी पहले से मैदान में डट गई थी।
700 करोड़ की योजनाओं की घोषणा के साथ शासनादेश भी हुए
मुख्यमंत्री धामी ने भी क्षेत्र में जाकर यह एलान किया कि जब तक उपचुनाव नहीं हो जाता, तब तक वह यहां के विधायक के रूप में काम करेंगे। परिणामस्वरूप केदारनाथ क्षेत्र के लिए सात सौ करोड़ की योजनाओं की घोषणाएं होने के साथ ही इनके शासनादेश भी जारी हुए।
मुख्यमंत्री धामी स्वयं कर रहे थे प्रचार अभियान की अगुआई
उपचुनाव में भाजपा के प्रचार अभियान की अगुआई भी मुख्यमंत्री धामी स्वयं कर रहे थे। उन्होंने क्षेत्र में पांच जनसभाओं व दो बाइक रैलियों में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ क्षेत्र के विकास कार्यों को रेखांकित किया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के केदारनाथ धाम के प्रति विशेष अनुराग को भी आगे रखा। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सात बार की केदारनाथ यात्रा का उल्लेख भी उन्होंने हर भाषण में किया।
प्रचार अभियान के दौरान विपक्ष ने मुख्यमंत्री की घेराबंदी भी की
भाजपा की प्रांतीय टीम के अलावा धामी सरकार के पांच मंत्रियों और कई विधायकों का उपचुनाव में बखूबी उपयोग किया गया। उपचुनाव के प्रचार अभियान के दौरान विपक्ष ने मुख्यमंत्री की घेराबंदी भी की, लेकिन परिणाम बता रहे हैं कि विपक्ष अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया।
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