उत्तराखंड में इस बार शीतकाल अब तक सूखा रहा है। हालांकि, नवंबर आमतौर पर साल का सबसे सूखा महीना माना जाता है, लेकिन अक्टूबर में भी वर्षा नहीं हुई और अब दिसंबर में भी अगले एक सप्ताह तो वर्षा-बर्फबारी की उम्मीद नहीं है।
ऐसे में दो माह से मौसम शुष्क बने रहने से ज्यादातर क्षेत्रों में तापमान भी सामान्य से अधिक बना हुआ है। जिससे ठंड भी समय पर नहीं पड़ रही है। एक अक्टूबर से शुरू हुए शीतकाल में अब तक सामान्य से 91 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इस बार 27 जून को उत्तराखंड में मानसून ने दस्तक दी थी।
जुलाई में मेघ सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक बरसे
मानसून के पहुंचने के बाद जुलाई में मेघ सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक बरसे। इसके बाद अगस्त में सामान्य से महज 09 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। वहीं, सितंबर में प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में जोरदार वर्षा का सिलसिला बना रहा। पूरे माह में सामान्य से 55 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। पूरे सीजन में ही प्रदेश के बागेश्वर जिले में सर्वाधिक और पौड़ी में सबसे कम वर्षा रिकार्ड की गई। इसके साथ ही मानसून सीजन में अब तक सामान्य वर्षा 1,163 मिमी के सापेक्ष 1,273 मिमी वर्षा दर्ज की गई। जो कि सामान्य से करीब 10 प्रतिशत अधिक रही। बीते दो अक्टूबर को उत्तराखंड से मानसून विदा हो गया।
पहाड़ से मैदान तक चटख धूप
मानसून की विदाई के बाद प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना रहा और पहाड़ से मैदान तक चटख धूप खिली। हालांकि, बीच में कुछ दिन पर्वतीय क्षेत्रों में बादलों ने डेरा डाला और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम वर्षा भी दर्ज की गई। लेकिन, यह नाममात्र की ही साबित हुई। इसके बाद नवंबर में भी प्रदेश में सूखे की स्थिति रही। बागेश्वर और पिथौरागढ़ में हल्की बौछारें पड़ीं।
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