उत्तराखंड का लोकपर्व फूलदेई मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री ने सपरिवार धूमधाम से मनाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री आवास में रंग विरंगे परिधानों में सजे बच्चों ने देहरी में फूल व चावल बिखेरकर पारंपरिक गीत ’फूल देई छमा देई, जतुक देला, उतुक सई, फूल देई छमा देई, देड़ी द्वार भरी भकार’ गाते हुए त्योहार की शुरुआत की। मुख्यमंत्री धामी ने सभी बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को फूलदेई त्यौहार की बधाई व शुभकामनाएं देते हुए देश व प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि लोक पर्वों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है।
हर साल धूम-धाम से मनाया जाता है ये त्यौहार
पहाड़ में प्रतिवर्ष चैत्र मास की संक्रांति से फूलदेई उत्सव मनाया जाता है। बच्चों में इसका खास उत्साह देखने को मिलता है। इस उत्सव को लेकर नन्हे मुन्ने बच्चों में उत्साह देखने को मिल रहा है। घरों की चौखट पर फूल डालने के बदले में ग्रामीण फुलवारी बच्चों को परम्परागत ढंग से चौलाई से बने खील व गुड़ देते हैं।
सजती है घोघा देवता की डोली
कई स्थानों पर बच्चे समूह में घोघा देवता (फूलदेई) की डोली को भी सजाकर बसंत गीतों के साथ झूम-झूम कर नाचते हैं। आठवें दिन बच्चों द्वारा सभी घरों से भोजन सामग्री व पूजा सामग्री को इकट्ठा कर सामूहिक भोज तैयार किया जाता है। इसके बाद बच्चों द्वारा घोघा देवता की पूजा-अर्चना एवं भोग लगाने के बाद ही भोजन को खुद ग्रहण करते हैं।
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