उत्तराखंड श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी उपनल कर्मचारियों के आदेश को लेकर चर्चा में ला दिया था. जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने संशोधित आदेश जारी किया है.
देहरादून: उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन दिए जाने का आदेश शासन कर चुका है. हालांकि यह आदेश हाई कोर्ट द्वारा 2018 में दिए गए फैसले का पालन करते हुए किया गया है. लेकिन इस दौरान आदेश में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु भी जोड़े गए हैं, जिसके हिसाब से ही फिलहाल विभिन्न विभागों में उपनल कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन दिया जा रहा है.
लेकिन ताजा मामला श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय का आया था जिसे ईटीवी भारत ने प्रमुखता से प्रकाशित भी किया है. संबंधित आदेश में स्पष्ट किया गया की 15 अक्टूबर 2024 तक सेवायोजित कर्मचारियों को इसका लाभ दिया जायेगा. शासन द्वारा जारी किए गए आदेश में 10 साल की सेवा और तिथि के रूप में जनवरी 2016 तक सेवायोजित कर्मियों को पहले चरण में इसका लाभ दिए जाने की बात लिखी गई थी.पूर्व में शासन स्तर से जारी इसी आदेश के आधार पर जब ईटीवी भारत ने खबर लिखी तो श्री देव सुमन विश्वविद्यालय ने भी एक संशोधित कार्यालय आदेश जारी कर दिया. जिसमें तारीख को लेकर पूर्व में आदेश के भीतर किया गया जिक्र हटा दिया गया.
संशोधित आदेश में 15 अक्टूबर 2024 तक सेवा आयोजित कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन का लाभ दिए जाने की बात को हटाकर 1 जनवरी 2016 तक सेवा आयोजित कर्मचारियों को इसका लाभ दिए जाने की बात लिखी गई है. इस मामले में ईटीवी भारत ने श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश चंद्रा से बात की तो उन्होंने कहा कि पूर्व में किए गए आदेश में गलती से तारीख को लेकर गलती हुई थी, जिसे सुधार लिया गया है.
विश्वविद्यालय के संशोधित आदेश का उपनल कर्मचारी विरोध करते हैं. विश्वविद्यालय ने जिस तरह से दबाव में यह आदेश संशोधित किया है वह कर्मचारियों के साथ धोखा है.
-विनोद कवि,अध्यक्ष, विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन-
हालांकि यह आदेश अब संशोधित कर दिया गया है, लेकिन इस आदेश की संशोधित होने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय ने जिस तरह से 2024 में भी सेवायोजित होने वाले उपनल कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन का लाभ देने का निर्णय लेकर उसका आदेश किया उसके बाद उपनल कर्मचारियों में खुशी दिखाई दी और अब जब शासन के आदेश के अनुरूप पुराने आदेश को संशोधित किया गया तो उपनल कर्मचारी इसको लेकर विश्वविद्यालय के इस संशोधित आदेश के खिलाफ हो गए हैं.
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