प्रदेश में इस लोकसभा चुनाव में भले ही भाजपा ने पांचों सीट पर जीत दर्ज की, लेकिन कुल 70 में से 10 विधानसभा सीटें ऐसी भी रहीं, जहां भाजपा प्रत्याशी को मुख्य प्रतिद्वंद्वी की तुलना में कम मत प्राप्त हुए हैं। इनमें दो विधानसभा सीट ऐसी हैं, जहां वर्तमान में भाजपा के विधायक हैं अथवा निर्दल विधायक ने भाजपा प्रत्याशी को अपना समर्थन दिया हुआ था। इससे चिंतित भाजपा अब इन सीटों पर कम मत मिलने के कारणों पर मंथन करेगी। साथ ही संबंधित पदाधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
प्रदेश की पांचों सीटों पर जीत
प्रदेश में इस लोकसभा चुनावों में कम मत प्रतिशत के बावजूद भाजपा ने आसानी से प्रदेश की पांचों सीटों पर जीत हासिल की है। भाजपा प्रत्याशियों की न्यूनतम जीत के अंतर का आंकड़ा 1.60 लाख के पार रहा। साथ ही प्रदेश की 70 में से 60 विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले अधिक मत प्राप्त हुए हैं। बावजूद इसके 10 विधानसभा सीटों पर पिछडऩे को भी भाजपा गंभीरता से ले रही है। इन सीटों में छह सीटें हरिद्वार और तीन सीटें टिहरी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र की हैं, जबकि एक सीट नैनीताल-ऊधम सिंह नगर की है। हरिद्वार में जिन छह सीटों पर भाजपा पीछे रही, उनमें से चार सीटें कांग्रेस और दो सीटें बसपा के पास हैं।
निर्दल प्रत्याशी ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई
वहीं, टिहरी गढ़वाल की तीन सीटों में से एक भाजपा, एक निर्दल और एक कांग्रेस के पास है। टिहरी गढ़वाल की इन तीन विधानसभा सीटों पर तीसरे स्थान पर रहने वाले निर्दल प्रत्याशी ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हुए भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी को पीछे छोड़ा। नैनीताल-ऊधम सिंह नगर की जसपुर सीट पर कांग्रेस के विधायक हैं। यही भाजपा के लिए सभी बड़ी चिंता का विषय भी है। इसे देखते हुए भाजपा इन सीटों पर परिणाम की समीक्षा करने जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना है कि चुनाव परिणामों की समीक्षा की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि यहां पार्टी किन कारणों से पीछे रही ताकि इन सीटों पर भविष्य में कमल खिलाया जा सके।
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