कथित हमलावर ओमान का नागरिक है. वहीं, कैप्टन मच्छर ने कहा कि वह दूसरों की जान नहीं जाने देंगे.
न्यूयॉर्क: फ्लाईदुबई की फ्लाइट नंबर 1073 को क्रैश कराने के मामले में नया अपडेट सामने आया है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक ओमानी नागरिक, हमाम अल-हम्मामी (Hamam al-Hammami) की पहचान फ्लाईदुबई के को-पायलट के रूप में की गई है, जिसने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया था और बुधवार को दुबई-तेल अवीव उड़ान में कथित तौर पर तोड़फोड़ करने का प्रयास किया था.
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि ओमान के अधिकारियों ने अल-हम्मामी को उनकी कट्टरपंथी विचारधारा के कारण पहले हवाई यात्रा करने से रोक दिया था. को-पायलट ने कैप्टन मच्छर पर चाकू से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, लेकिन मच्छर ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे यात्री हमलावर को काबू में कर पाए.
बता दें, 74 यात्रियों को ले जा रही इस फ्लाइट ने इमरजेंसी सिग्नल भेजे और सऊदी अरब के तबुक शहर में इमरजेंसी लैंडिंग की. लैंडिंग करने से पहले विमान 34,000 फीट की ऊंचाई पर था, लेकिन अचानक से 17,000 फीट से ज्यादा नीचे आ गया. वहां अधिकारियों ने अल-हम्मामी को हिरासत में ले लिया. वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, कथित हमलावर ओमान का नागरिक है, जिसका नाम हमम अल-हम्मामी (Hamam al-Hammami) है. रिपोर्ट के अनुसार, उनका जन्म ओमान के पिता और सीरिया की मां के यहां हुआ था.
इससे पहले शुक्रवार को मच्छर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की और हमले के बाद के डरावने पलों का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपनी जान बचाने के लिए लड़ रहे थे, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि वे दूसरों की जान नहीं जाने देंगे. उन्होंने यह नहीं बताया कि उन पर हमला किस वजह से हुआ या को-पायलट का मकसद क्या था. यूएई (UAE) के एक अस्पताल में इलाज करा रहे कैप्टन मच्छर को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ‘असली हीरो’ बताया.
इस हमले ने यहां की ट्रैवल इंडस्ट्री को संकट में डाल दिया है, जिससे एविएशन सिक्योरिटी पर सवाल उठ रहे हैं और अमेरिका-ईरान युद्ध से पहले ही हिले हुए मिडिल ईस्ट में और बेचैनी बढ़ गई है. इलाके में इसकी जांच चल रही है. संयुक्त अरब अमीरात ने इजराइल के लिए सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं, जिससे उन सैकड़ों यात्रियों के लिए यात्रा मुश्किल हो गई है जो आम तौर पर इन देशों के बीच आते-जाते हैं.
इजराइल और यूएई (UAE) के बीच कमर्शियल यात्रा पर रोक लगने के बाद UAE में फंसे यात्रियों को वापस लाने के लिए, दोनों देश शुक्रवार से वापसी उड़ानें (repatriation flights) शुरू करने पर सहमत हुए हैं. यह जानकारी एक इजराइली अधिकारी ने दी, जिन्हें सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने की अनुमति नहीं थी और जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर यह बात कही.
बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, पहली वापसी उड़ान UAE से रात 11 बजे से कुछ देर पहले रवाना हुई और रात 1 बजे के ठीक बाद तेल अवीव में उतरी. एयरपोर्ट की लिस्ट में अर्किया और इजरायर एयरलाइंस शामिल थीं, जिनकी उड़ानें शनिवार सुबह दुबई से पहुंचने वाली थीं. रविवार को अल अल एयरलाइन के जरिए दुबई से इजराइल तक यात्रियों को ले जाने की उम्मीद थी. 2020 में इजराइल और UAE के बीच संबंध सामान्य करने के लिए ट्रंप प्रशासन के ‘अब्राहम समझौते’ के तहत रिश्ते कायम होने के बाद से दुबई इजराइलियों के लिए एक लोकप्रिय जगह बन गया है.
हमलों से चरमपंथ पर सवाल उठने लगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों को बताया कि उन्हें मिली शुरुआती जानकारी से इस हमले और तेहरान के बीच संबंध होने का संकेत मिलता है, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया. ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर यह साबित हो जाता है कि हमले के पीछे ईरानी एजेंट थे, तो अमेरिका ‘उन पर बहुत कड़ा प्रहार’ करेगा.
एक अधिकारी के अनुसार, जो मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं थे और जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बात की, इस जांच में इजराइली जांचकर्ता भी शामिल हैं, लेकिन मुख्य भूमिका अमीराती अधिकारियों की है. अधिकारी ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि हमलावर किसी समूह का हिस्सा था या नहीं, और उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल ईरान से किसी संबंध का कोई सबूत नहीं है.
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि को-पायलट ‘इस्लामी कट्टरपंथ’ का शिकार हो गया था, लेकिन उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया है. नेतन्याहू ने शुक्रवार को एक वीडियो संदेश में कहाकि हम अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या उसे भेजा गया था, और जिसने भी उसे भेजा है, उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.
UAE के सीनियर डिप्लोमैटिक एडवाइजर अनवर गर्गश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में फ्लाईदुबई पर हुए हमले को ‘खतरनाक आतंकवादी हरकत’ बताया. उन्होंने एक बड़ी दुर्घटना को टालने का श्रेय फ्लाइट कैप्टन को दिया.
यह समय यूएई (UAE) सरकार के लिए एक परीक्षा है; सरकार ने चरमपंथी गतिविधियों के खिलाफ असरदार उपाय करने के लिए अपनी पहचान बनाई है, लेकिन अतीत में सुरक्षा में चूक की आलोचना पर वह नाराज भी होती रही है. वॉशिंगटन में सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में ग्लोबल सिक्योरिटी और जियोस्ट्रेटेजी के चेयर, जॉन ऑल्टरमैन ने कहा कि अमीराती अपनी साख बचाने में दिलचस्पी लेंगे. वे चाहते हैं कि लोग उन्हें एक ऐसी जगह के तौर पर देखें जो बहुत सुरक्षित हो, न कि ऐसी जगह जहाँ सुरक्षा में गंभीर चूक होती हो.
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