नैसर्गिक सुंदरता से परिपूर्ण उत्तराखंड की वादियां फिल्म शूटिंग के लिए बड़े गंतव्य के रूप में उभर रही हैं। राज्य में फिल्म व धारावाहिकों की शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड फिल्म नीति लागू की गई है। इसके तहत अनुदान की व्यवस्था की गई है। सरकार ने साफ किया है कि उन्हीं फिल्म निर्माता-निर्देशकों को अनुदान मिलेगा, जो तय समयावधि के भीतर यह शपथ पत्र दाखिल करेंगे कि फिल्म की 75 प्रतिशत से अधिक शूटिंग राज्य में ही हुई है। सूचना महानिदेशक एवं उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने इस कड़ी में अनुदान प्रस्तावों पर निर्णय लेने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि फिल्म अनुदान के प्रस्ताव पर तकनीकी व वित्त समिति की संस्तुति के उपरांत निर्णय लिया जाएगा। परिषद को प्राप्त होने वाले प्रस्तावों के आधार पर बैठकों का निर्धारण होगा।
सामान्यतः प्रतिवर्ष जुलाई व जनवरी में ये बैठकें होंगी। जुलाई की बैठक में 31 मार्च तक और जनवरी की बैठक में 31 अक्टूबर तक के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। विशेष परिस्थिति में बैठक बुलाने के संबंध में मुख्य कार्यकारी अधिकारी निर्णय ले सकते हैं। यही नहीं, फिल्म अनुदान के लिए प्रस्ताव जमा करने को समय सीमा का निर्धारण भी कर दिया गया है। सेंसर प्रमाणपत्र प्राप्त होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर अनुदान के लिए परिषद को प्रस्ताव प्राप्त होने चाहिए। साफ किया गया है कि इसके बाद मिलने वाले प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा। फिल्म फेस्टिवल में भाग लेने की स्थिति समय सीमा में विचलन के लिए फिल्म निर्माता को लिखित रूप में अनुमति प्राप्त करनी होगी। परिषद ने अधिसूचित ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रसारित फिल्मों पर अनुदान देने का निर्णय लिया है। इस क्रम में पांच ओटीटी प्लेटफार्म अधिसूचित किए गए हैं।
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