राजभवन में आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में वृंदावन से आए टीम अवध के कलाकारों द्वारा फूलों की होली खेली गई। होली मिलन में कलाकारों ने कृष्ण लीला पर आधारित सुंदर प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने फूलों की होली के साथ-साथ लट्ठ मार होली के माध्यम से भी अपनी प्रस्तुतियां दी, जिनका उपस्थित व्यक्तियों ने आनंद उठाया। शुक्रवार को आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने प्रतिभाग करते हुए सभी को होली की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि टीम अवध के कलाकारों द्वारा अपने ही अंदाज में प्रस्तुति दी गईं। यहां की होली विश्वभर के लोगों को आकर्षित करती है, जिसमें अलग ही उमंग और उत्साह देखने को मिलता है।
कलाकारों को राज्यपाल ने कहा धन्यवाद
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने वृंदावन से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों के लिए उनका धन्यवाद किया। इस दौरान ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत बिहार राज्य का स्थापना दिवस मनाया गया।
राज्य स्थापना दिवस की दी बधाई
राज्यपाल ने उपस्थित बिहार के निवासियों को राज्य स्थापना दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बिहार की पवित्र भूमि उन महान विभूतियों की याद दिलाती है, जिन्होंने इस धरती से उठकर विश्वभर में अपनी छाप छोड़ी। यह राज्य संस्कृति की विविधता और समृद्धता के ताने-बाने से परिपूर्ण है।
कार्यक्रम में ये लोग हुए शामिल
कार्यक्रम में प्रथम महिला गुरमीत कौर, अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, एडीजी अमित सिन्हा, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, सचिव सचिन कुर्वे, आइजी विम्मी सचदेवा रामन, निदेशक संस्कृति बीना भट्ट, संयुक्त निदेशक सूचना डा नितिन उपाध्याय, एजीएफ ट्रस्ट वृंदावन के अवधेश महाराज, अनुज गोविंद सहित राजभवन के अधिकारी, कर्मचारी एवं उनके स्वजन उपस्थित रहे।
You may also like
-
उत्तरकाशी: पापड़गाड़ में फिर धंसा गंगोत्री हाईवे, तेजी से चौड़ी होती गई दरार, क्यार्क गांव पर मंडराया खतरा
-
श्रीनगर बेस अस्पताल में शुरू हुई अत्याधुनिक डिजिटल अल्ट्रासाउंड सेवा, पहाड़ के मरीजों को बड़ी राहत
-
हरिद्वार में कार में छिपकर बैठा था 7 फीट लंबा रेड स्नेक, मचा हड़कंप
-
गणेश गोदियाल ने ली कांग्रेस की बूथ-ब्लॉक और मंडल कार्यकर्ताओं की बैठक, बांकीपुर और दतिया में बीजेपी की हार से दिखे उत्साहित
-
आस्था, तप, संयम का महासंगम: पौराणिक काल से ड्रोन युग तक कितनी बदली कांवड़ यात्रा? जानें पैदल कांवड़ क्यों मानी जाती है श्रेष्ठ