जयशंकर ने UAE के डिप्टी PM अल-नाहयान के साथ की बैठक, द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर की चर्चा

जयशंकर ने कहा कि पिछले एक दशक की भारत-यूएई पार्टनरशिप हमारे दोनों देशों के बदलते वैश्विक माहौल पर प्रतिक्रिया देने का एक बेहतरीन उदाहरण है.

अबू धाबी: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल-नाहयान के साथ बैठक की. इस दौरान दोनों नेताओं ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी की भावना से द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.

सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में जयशंकर ने कहा, ‘यूएई के उप प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बिन जायद के साथ एक अच्छी और फायदेमंद मीटिंग हुई. हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी की भावना से द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.’

जयशंकर अबू धाबी में रायसीना डायलॉग के ‘मिडिल ईस्ट सेशन’ में अब्दुल्ला बिन जायद अल-नाहयान के साथ भी शामिल हुए, जिसका टाइटल था ‘आगे की दुनिया: पावर, मकसद और संभावना’. एक्स पर एक और पोस्ट में विदेश मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल-नाहयान के साथ जुड़कर बहुत खुशी हुई.

हमारी बातचीत में इस बात पर जोर दिया गया कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की बढ़ती गति को पहचानना महत्वपूर्ण है. यह दीर्घकालिक रुझान और तात्कालिक झटके दोनों को दर्शाता है. देश अपनी विशिष्ट स्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं. उस प्रयास में नई साझेदारियां और नए विकल्प अनिवार्य रूप से तलाशे जाते हैं.

इसमें पारंपरिक आराम क्षेत्रों से परे जाना और तीव्र रणनीतिक जागरूकता विकसित करना शामिल है. बहुपक्षवाद का सुधार अत्यावश्यक है. इसे मजबूत लघुपक्षवाद के माध्यम से समर्थन दिया जा सकता है. पिछले दशक की भारत और यूएई की साझेदारी हमारे दोनों देशों द्वारा बदलते वैश्विक परिवेश पर प्रतिक्रिया देने का एक बेहतरीन उदाहरण है.

बातचीत के दौरान जयशंकर ने ग्लोबल ऑर्डर में बदलाव की बढ़ती रफ़्तार पर जोर दिया और कहा कि यह लंबे समय के ट्रेंड और तुरंत लगने वाले झटके, दोनों को दिखाता है. उन्होंने कहा, ‘ग्लोबल ऑर्डर में बदलाव की बढ़ती रफ़्तार को पहचानना जरूरी है. यह लंबे समय के ट्रेंड और तुरंत लगने वाले झटके, दोनों को दिखाता है.’ उन्होंने कहा कि देश अपने खास हालात के हिसाब से नई पार्टनरशिप और विकल्प तलाश रहे हैं.

जयशंकर ने कहा, ‘देश अपने खास हालात के हिसाब से जवाब देते हैं. इस कोशिश में नई पार्टनरशिप और नए विकल्प जरूर तलाशे जाते हैं.’ ज्यादा सामरिक जागरूकता की जरूरत पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा, ‘इसमें पारंपरिक कम्फर्ट जोन से आगे बढ़कर ज़्यादा तेज सामरिक जागरूकता विकसित करना शामिल है.’ जयशंकर ने बहुपक्षीय संस्थान में तुरंत सुधार की भी मांग की और उस प्रोसेस को सपोर्ट करने में छोटे ग्रुप की भूमिका पर जोर दिया.

भारत-यूएई के रिश्ते का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच पार्टनरशिप ने दिखाया है कि उन्होंने ग्लोबल माहौल में बदलावों पर कैसे प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आगे कहा, ‘पिछले एक दशक की भारत-यूएई पार्टनरशिप हमारे दोनों देशों के बदलते वैश्विक माहौल पर प्रतिक्रिया देने का एक बेहतरीन उदाहरण है.’

इससे पहले जयशंकर ने यूएई के अपने आधिकारिक दौरे के दौरान जॉर्जिया के फॉरेन मिनिस्टर माका बोटचोरिशविली से मुलाकात की और बिजनेस, कनेक्टिविटी, कल्चर और लोगों के बीच संबंधों पर चर्चा की. बुधवार को एक एक्स पोस्ट में जयशंकर ने कहा, ‘जॉर्जिया के विदेश मंत्री माका बोटचोरिशविली से मिलकर खुशी हुई.’

उन्होंने आगे कहा, ‘ट्रेड, टूरिज्म और एजुकेशन सहित हमारे संबंध बढ़ रहे हैं. बिजनेस, कनेक्टिविटी, कल्चर और लोगों के बीच सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा हुई. मौजूदा रीजनल डेवलपमेंट पर भी बात हुई.’ जयशंकर तीन दिन के दौरे (14-16 अक्टूबर) के लिए यूएई के अबू धाबी पहुंचे.

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