पुष्कर सिंह धामी सरकार ने प्रदेश के सरकारी, अर्द्ध सरकारी, सार्वजनिक उपक्रमों, निकायों एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत कार्मिकों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी कर दी। उन्हें पदोन्नति में शिथिलीकरण का लाभ पाने के लिए हर छह महीने में शासनादेश जारी होने की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। यह लाभ उन्हें नियमित रूप से मिल सकेगा। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने प्रदेश के सरकारी, अर्द्ध सरकारी, सार्वजनिक उपक्रमों, निकायों एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत कार्मिकों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी कर दी। उन्हें पदोन्नति में शिथिलीकरण का लाभ पाने के लिए हर छह महीने में शासनादेश जारी होने की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। यह लाभ उन्हें नियमित रूप से मिल सकेगा।
विभागीय सेवा नियमावलियों की अलग-अलग व्यवस्था समाप्त
यही नहीं, कार्मिक की इस नियमावली के लागू होने के बाद पदोन्नति में शिथिलता को लेकर अब विभागीय सेवा नियमावलियों की अलग-अलग व्यवस्था समाप्त हो गई है। सभी विभागों के लिए इस नियमावली के प्रविधान लागू होंगे। इससे पहले वर्ष 2010 में जारी उत्तराखंड सरकारी सेवक पदोन्नति के लिए अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण नियमावली (समय-समय पर यथासंशोधित) अब निरस्त समझी जाएगी। वरिष्ठ कार्मिकों की पदोन्नति नहीं होगी बाधित अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नति में निर्धारित सेवा अवधि में छूट का लाभ पहले ले चुके कार्मिक दोबारा इसके पात्र नहीं होंगे। इस संबंध में विभागों की सेवा नियमावलियों में प्रविधान हाेगा, तो वह लागू नहीं माना जाएगा।
पदोन्नति में छूट की संस्तुति करेगी समिति
शासनादेश में कहा गया कि पदोन्नति में छूट के लिए प्रशासनिक विभाग, कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से परामर्श लेना होगा। समूह-ग सेवा संवर्ग के पदधारकों को पदोन्नति में छूट के लिए संबंधित विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। इसमें वित्त नियंत्रक और विभागाध्यक्ष से नामित एक अन्य अधिकारी सदस्य के रूप में रहेंगे। समिति की संस्तुति पर शिथिलीकरण किया जा सकेगा।
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