देहरादून। उत्तराखंड सरकार राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में कृषि विभाग द्वारा विभिन्न जिलों में किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना है।
राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं। यहां की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां प्राकृतिक खेती के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक उत्पादों की मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में उत्तराखंड के किसानों के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किसानों को जैविक खाद तैयार करने, कीट नियंत्रण के प्राकृतिक उपाय अपनाने और फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने के तरीकों की जानकारी दी जा रही है। विभाग का मानना है कि इससे उत्पादन लागत कम होगी और किसानों की आय बढ़ेगी।
कई किसान पहले ही जैविक खेती अपनाकर बेहतर परिणाम प्राप्त कर चुके हैं। उनका कहना है कि बाजार में जैविक उत्पादों को अधिक कीमत मिल रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
सरकार आने वाले समय में जैविक उत्पादों के विपणन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं लागू करने की तैयारी कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान सफल रहा तो उत्तराखंड देश में जैविक कृषि का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
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