आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार, 5 जून 2026 को इस बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे.![]()
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज यानी बुधवार, 3 जून 2026 से शुरू हो गई है. वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और उतार-चढ़ाव के बीच हो रही इस बैठक पर पूरे देश के बाजारों और आम जनता की नजरें टिकी हैं. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार, 5 जून 2026 को इस बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे.
ब्याज़ दरों में बदलाव की उम्मीद कम
आर्थिक जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार भी अपनी मुख्य ब्याज दर (रेपो रेट) में कोई बदलाव नहीं करेगा. इसका मतलब है कि आम जनता के लिए होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) फिलहाल जैसी है वैसी ही बनी रहेगी. वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार काफी अस्थिर हैं, जिसे देखते हुए आरबीआई जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहता.
महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों का डर
भले ही ब्याज दरों में राहत मिलने की उम्मीद कम हो, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार आरबीआई का रुख इस बार काफी सख्त हो सकता है. इसके मुख्य कारण हैं.
कच्चा तेल: दुनिया भर में जारी तनाव की वजह से कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. अगर आरबीआई अपनी पुरानी गणना (85 डॉलर प्रति बैरल) को बढ़ाकर नई कीमतों के हिसाब से तय करता है, तो देश में महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत के करीब पहुंच सकता है.
कम मानसून का खतरा: इस साल सामान्य से कम बारिश (मानसून) होने की आशंका जताई जा रही है. इसके साथ ही हाल ही में ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का खतरा है.
थोक महंगाई का असर: थोक बाजार में बढ़ती महंगाई का सीधा असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार पर भी पड़ सकता है, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा.
आर्थिक विकास (ग्रोथ) की रफ्तार
अलग-अलग रेटिंग एजेंसियों और बैंकों ने आने वाले समय के लिए देश की आर्थिक विकास दर को लेकर अपने अनुमान जारी किए हैं.
केयरएज रेटिंग्स: इसके अनुसार, यदि कच्चा तेल 90 डॉलर के आसपास रहता है, तो देश की विकास दर 6.7 प्रतिशत रह सकती है. लेकिन तनाव बढ़ने पर यह घटकर 6 प्रतिशत तक गिर सकती है.
एसबीआई रिसर्च: भारतीय स्टेट बैंक के रिसर्च विभाग ने इस साल (FY27) विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है.
बाजार के जानकारों का कहना है कि ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला इस साल के अंत यानी साल 2026 की आखिरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) से पहले शुरू होने की कोई संभावना नहीं है.
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