शहरी स्थानीय निकाय अब अपने स्वामित्व व प्रबंधन की संपत्ति, भूमि व भवन को बाजार दर पर ही किराये अथवा लीज पर दे सकेंगे। निकायों को लीज पर आवंटित संपत्तियों के नवीनीकरण के मामलों में शासन से अनुमोदन लेना भी अनिवार्य किया गया है। शहरी विकास सचिव नितेश कुमार झा ने इस सिलसिले में सभी नगर निकायों को आदेश जारी किए हैं। शहरी निकायों की आर्थिक स्थिति सुधारने के दृष्टिगत यह कदम उठाया गया है।
बाजार से काफी न्यून होती हैं दरें
नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतें अपने स्वामित्व वाले भवनों, दुकानों समेत अन्य संपत्तियों को किराये अथवा लीज पर देते हैं। अधिकांश मामलों में पाया गया है कि ये दरें बाजार दर से काफी न्यून होती हैं। ऐसे में निकायों को इनसे अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो पाता और जिस उद्देश्य से संपत्तियों को लीज या किराए पर दिया गया है, वह सफल नहीं हो पाता। परिणाम स्वरूप निकायों को आय के स्रोत के लिए सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है।
शहरी विकास सचिव नितेश कुमार झा ने भेजा आदेश
शहरी विकास सचिव नितेश कुमार झा की ओर से सभी नगर निकायों को भेजे गए आदेश में कहा गया है कि निकायों द्वारा अपनी संपत्तियों को बाजार से काफी कम दरों पर किराये या लीज पर दिया जा रहा है। लीज पर आवंटित जिन संपत्तियों की लीज खत्म हो गई है, उन्हें भी बिना शासन के अनुमोदन के बाजार दरों से न्यून पर नवीनीकृत किया जा रहा है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि लीज नवीनीकरण से संबंधित प्रस्तावों को शासन के अनुमोदन के बिना नवीनीकृत नहीं किया जाएगा। साथ ही भवन, भूमि, व्यावसायिक भवन आदि को किराये अथवा लीज पर प्रचलित बाजार दर से न्यून दरों पर आवंटित नहीं किया जाएगा। इसे बाजार मूल्य या इससे अधिक दरों पर आवंटित किया जाएगा।
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